दादा तेजू पीर सेवा समिति गांव मोडा खेड़ा में कई सालों से कार्यरत है और यह गांव की भलाई में आगे बढ़ चढ़कर भाग लेती है। यहां पर हमारा बहुत ही बढ़िया मंदिर है और यहां पे हमने एक लाइब्रेरी भी बनाई हुई है।
गांव मोडा खेड़ा की स्थापना आज से लगभग 225 वर्ष पूर्व में हुई इस गांव के पूर्वज राजस्थान में जिला चूरू के जलानीअसर से चौधरी डायाराम सीवर ने आकर उत्तर दिशा में मिर्जावली गांव बसाया और धीरे-धीरे अन्य गांव में लोगों को लाकर बसाने का काम किया था कि गांव का स्थायित्व बन सके लेकिन कुछ पड़ोसी गांव के लोग आकर गांव वालों को तंग करने लगे। वह गांव छोड़ने के लिए मजबूर करने लगे। तब दयाराम सीवर ने अन्य गांव के लोगों की मदद से उन लोगों के साथ संघर्ष किया, जिससे इसके नाम मोडा खेड़ा ( कंधों के बलपूर्वक ) से गांव का नाम मोडा खेड़ा रखा गया। आज गांव में 36 बिरादरी के लोग भाईचारे से रहते हैं।